
दिल्ली ही नहीं भारत की शान है मेट्रो
प्रकाशित: 25 जुलाई 2010
अभय कुमार पण्डेय
नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो का सफरनामा कीर्तिमानों का पूरक हो गया है। शायद ही विश्व की कोई मेट्रो सेवा हो जो इतने कम समय में सभी सुरक्षा व सुविधा मानकों को पूरा करते हुए यात्रियों की पहली पसंद बना है। दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरशन ने पिछले एक के अन्तराल में 3 (तीन) अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम कर विश्व भर में अपनी अलग छाप बना ली है।
इस वर्ष 23 मार्च को लन्दन विक्टोरिया पार्प टेरापिड कारपोरेशन द्वारा विश्व मेट्रो सेवा पुरस्कार कार्यकम में 70 देशों के मेट्रो पणालियों को डीएमआरसी ने पछाड़ कर बेस्ट इम्पुव्ड यानी उत्कृष्ट मेट्रो सेवा का पुरस्कार अपने नाम किया। यह वह पल था जब विक्टोरिया पार्प में डीएमआरसी न सिर्प अपनी महारत का पुरस्कार पाया बल्कि इस पुरस्कार ने विश्व पटल पर भारत का पहचान का नया रूप दे दिया।
दिल्ली मेट्रो का सुखद परिवहन व्यवस्था पणाली पर भारत के आम आदमी को गर्व करने वाला एहसास कराता है। दिल्ली मेट्रो को चुनौतियों में काम करना उनके हुनर को और निखार कर सामने लाता है।
कामनवेल्थ पोजेक्ट के तहत बनने वाले रूट का लक्ष्य इन्हीं चुनौतियों में से एक था लेकिन डीएमआरसी ने अपने बेहतरीन कार्य पणाली की बदौत समय अवधि के भीतर ही रूटों को शुरू कर सभी आलोचकों का जवाब दे दिया।
दिल्ली मेट्रो के पोजेक्ट समय अवधि के अन्तराल में पूरा करने में डीएमआरसी के सिविल इंजिनियरिंग अहम् योगदान दिया। मेट्रो के सिविल इंजिनियरिंग ने अपने कार्यपणाली से विश्व भर के देशों का ध्यान अपनी ओर खींचा और इसी का नतीजा रहा है कि एशियन सिविल इंजिनियरिंग को आरडिनेटिंग कांउसील ने वर्ष 2012 में सर्वश्रेष्ठ इंजिनियरिंग पुरस्कार से डीएमआरसी को नवाजा गया।
दिल्ली मेट्रो ने जहां अपना पोजेक्ट समय अवधि पूरता करता आ रहा है वहीं बेहतरीन परिवहन व्यवस्था के इस संचालन के साथ-साथ यात्रियों को जागरूक करने व यात्रियों ाकेयात्रा के दौरान बेहतर आचरणकर्ता बनाने के लिए वालंटियर मुहिम की शुरूआत की जिसमें मेट्रो में आम यात्रियों को इस कार्यकम से जोड़ा गया।
दिल्ली मेट्रो के सिटिजन फोरम वालंटियर कार्यकम को विश्व भर में सराहा गया। साथ ही अभी हाल में भी ’इंटरनेशनल बिजनेस अवार्ड 2010“ स्टीव अवार्ड्स से दिल्ली मेट्रो को उनके जनसम्पर्प व सामुदायिक में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए सम्मानित किया गया। दिल्ली मेट्रो दिल्ली की ही नहीं देश की शान बन गई है बस इंतजार है तो ऐसा सुगम परिवहन भारत के सभी पमुख शहरों में भी दौड़े और यात्रियों की लाइफ लाइन बन जाए।
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