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सोमवार, 8 अगस्त 2011

खेलों की ब्रांडिंग पर 10 करोड़ रुपये हुए थे स्वाहा

अभय वुमार पाण्डेय नईं दिल्ली। राजधानी में बीते वर्ष हुए कॉमनवेल्थ खेलों में शेरा को विशेष पहचान दिलाने के मकसद से ब्रांडिंग पर 10 करोड़ रुपये लगाया गया और इसके लिए विशेष कम्पनी को यह जिम्मेदारी सौंपी गईं। ग्राॉफिक्स व बैनर से होने वाले इस ब्रांडिंग के जरिये खेल समाचार व माव्रेटिंग सेवा होनी थी लेकिन इस जीएनएस सिस्टम ने काम करना बन्द किया और आयोजन समिति को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ी।

वैग रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 10 करोड़ रुपये की भारी राशि खर्च कर जीएनएस सेवा को आउटसोर्स करने का पैसला किया गया जबकि मेलबोर्न सीडब्ल्यूडी 2006 खेलों में इससे बहुत कम दामों पर यह व्यवस्था आंतरिक रत्रोतों के जरिये की गईं थी।

वैग ने कॉमनवेल्थ खेलों में जीएनएस ब्रांडिंग की निविदा को भी कटघरे में खड़ा किया है। इस मूल निविदा को रद्द कर एक विशेष कम्पनी को लाभ पहुंचाने के मकसद से उसे इस बीड में अकेले शामिल किया गया।

इस पूरे ब्रांडिंग में अनियमितता के बाद 5 से 8 अक्तूबर तक किसी को भी खेल सूचनाएं नहीं मिल पाईं।

आयोजन समिति ने बाद में इस सेवा को जारी रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर निर्भर होना पड़ा।

खेलों के प्राचार के लिए बैनर लगाने में भी वैग ने धांधली की बात कही है। पहले बैनर लगाने का काम समूहों के आधार पर लगाने का पैसला किया गया। बाद में वक्त की कमी दिखाकर आकस्मिक निविदा प्राव््िराया की गईं जिसमें अयोग्य कम्पनियों को बोली लगाने की छूट दी गईं जबकि कईं कम्पनियां जो इस निविदा के लिए योग्य थीं उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया गया। इस निविदा में अलग-अलग ठेके विभिन्न दरों में देने का भी मामला प्राकाश में आया है।

वुल मिलाकर देखा जाए तो यह साफ होता है कि खेलों के ब्रांडिंग के नाम पर 9 करोड़ रुपये स्वाहा हो गए जबकि ऐसे सेवाओं में आउटसोर्स रत्रोतों का प्रायोग क्यों किया गया, यह भी सवालों के घेरे में

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